अफ्रीका के निवासियों ने अपनी सीमित साधनों के बावजूद यूरोपीय शक्तियों का भरपूर प्रतिरोध किया लेकिन उनके ज्यादातर प्रतिरोध अंततः सर्फर सफल रहे ब्रिटिश पत्रकार एडवांटम मोरेल ने कुछ समय अफ़्रीका में बिताया था और अफ्रीका पर एक किताब लिखी थी द ब्लैक मेंस बर्डन उसमें उन्होंने अफ्रीकी लोगों के प्रतिरोध की असहाय स्थिति को इन शब्दों में लिखा है।
जो अन्याय और दुर्व्यवहार एक अफ्रीकी अपने जीवन में सहायता है उसका विरोध किसी भी अफ्रीकन के द्वारा अफ्रीका में कहीं भी संभव नहीं है अफ्रीकी मूल के निवासी यूरोपीय श्वेत नस्ल के पूंजीवादी शोषण साम्राज्यवाद और संवाद के सामने बिल्कुल असहाय है।
माझी माझी विद्रोह
पूर्वी अफ्रीका में जर्मनी का नियंत्रण था जर्मन शासन इस क्षेत्र के लोगों को खाद्यान्न के स्थान पर नकदी फसल कपास की खेती करने के लिए जबरदस्ती कर रहे थे यह कपास मुख्यतः जर्मनी के कारखानों के लिए जरूरी था सन उन्नीस सौ पांच में एकाएक अफवाह फैली कि जादुई पवित्र जल को अगर शरीर पर छिड़क दिया जाए तो जर्मन गोलियों पानी बन जाएंगी ।लगभग 20 आदिवासी समुदाय के लोग जर्मन हुकूमत से लड़ने के लिए एक हो गए उनका विश्वास था कि उनके भगवान ने उन्हें इस लड़ाई के लिए आदेश दिया है और उनके पूर्वज इस युद्ध में उनकी रक्षा करेंगे।
यह विद्रोह माझी माझी विद्रोह के नाम से जाना जाता है किंतु जब इन विद्रोही सैनिकों ने अपने बालों के साथ जर्मन सैन्य ठिकाने पर हमला किया तो जर्मन मशीन गन के करीब 75000 आदिवासी मारे गए इसके बाद आकाल में लगभग दोगुने लोग मारे गए।
इथोपिया का सफल प्रतिरोध
इथोपिया एकमात्र अफ्रीकी देश था जिसने सफलतापूर्वक यूरोपीय देशों का प्रतिरोध किया सन् 1889 में मैंने लिख दो पिया का शासक बना उस समय बरेली में सम्मेलन के बाद ब्रिटिश प्रिंट एवं इटालियन लोग सभी इथोपिया को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने की कोशिश कर रहे थे मैंने लिख ने बड़ी चालाकी से इनको एक दूसरे के खिलाफ उपयोग किया इन सबके बीच उसने फ्रांस और रूस से भारी मात्रा में गोला-बारूद और बंदूकें खरीद रखी थी।सन 1889 में इटली ने मैंने लिख के साथ एक संधि की संधि के लिए जो दस्तावेज बनाए गए थे वही जो पिया और इटालियन भाषा में अलग-अलग थे संधि के अनुसार इथियोपिया का एक छोटा हिस्सा इटली को देना था लेकिन इटली ने पूरे इथोपिया को अपने संरक्षण में लेने का दावा किया था।
इसी बीच में इटली के सेना उतरी इथियोपिया में आगे बढ़ने लगी फतेह मैंने लिख ने इटली के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी सन 1896 में हुए एडवा की लड़ाई में क्यों किया कि सेना ने इटली के सेना को हराकर नया इतिहास बनाया।
टांगों में रबड़ की खेती और स्थानीय समुदायों का नरसंहार
बेल्जियम के शासक लियोपोल्ड द्वितीय अफ्रीका में अपनी निजी जागीर बनाना चाहता था उसने सन 1879 से सन 1882 कांगो के जनजातीय सरदारों से चलकर कोई संध्या की जिनके आधार पर उसने कांगो में 23 लाख वर्ग किलोमीटर विभाग पर कब्जा कर लिया यह बेल्जियम से करीब 80 गुना ज्यादा बढ़ा क्षेत्र था यह उसकी निजी संपत्ति थी।लियोपोल्ड ने आदेश दिया कि कांगो के सब लोग जंगलों में रबड़ हाथी रात आधी लाकर सरकार को निर्धारित कीमतों पर देंगे जो अपने हिस्से का रावण नहीं देगा उसे मार डालने या हाथ काटने का आदेश थे।
लोगों से राजा के लिए सामान एकत्र करने का ठेका कई कंपनियों को दिया गया था इन कंपनियों ने वहां के मूल निवासियों के साथ क्रूरता की एक नई मिसाल कायम कर दी अगर कोई स्थानीय व्यक्ति निश्चित मात्रा में रबड़ नहीं ला पाता था तो वे उनका हाथ काट लेते थे।
माना जाता है कि कम से कम सौ लाख कांगो वासी इस अत्याचार के कारण मारे गए अंततः इस व्यवस्था को सन 1908 में समाप्त किया गया और टांगों का शासन बेल्जियम की संसद ने अपने हाथों में ले लिया।
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